आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इससे न तपेदिक होती है।
आराम सुधा की एक बूंद, तन का दुबलापन खोती है।
आराम शब्द में ‘राम’ छिपा जो भव-बंधन को खोता है।
आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है।
इसलिए तुम्हें समझाता हूँ, मेरे अनुभव से काम करो।
ये जीवन, यौवन क्षणभंगुर, आराम करो, आराम करो।
यदि करना ही कुछ पड़ जाए तो अधिक न तुम उत्पात करो।
अपने घर में बैठे-बैठे बस लंबी-लंबी बात करो।
करने-धरने में क्या रक्खा जो रक्खा बात बनाने में।
जो ओठ हिलाने में रस है, वह कभी न हाथ हिलाने में।
तुम मुझसे पूछो बतलाऊँ — है मज़ा मूर्ख कहलाने में।
जीवन-जागृति में क्या रक्खा जो रक्खा है सो जाने में।
मैं यही सोचकर पास अक्ल के, कम ही जाया करता हूँ।
जो बुद्धिमान जन होते हैं, उनसे कतराया करता हूँ।
दीए जलने के पहले ही घर में आ जाया करता हूँ।
जो मिलता है, खा लेता हूँ, चुपके सो जाया करता हूँ।
मेरी गीता में लिखा हुआ — सच्चे योगी जो होते हैं,
वे कम-से-कम बारह घंटे तो बेफ़िक्री से सोते हैं।
- गोपालप्रसाद व्यास
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Thursday, March 08, 2007
Tuesday, January 23, 2007
हिंदी लिखने के तरीके
इस समय मैं जो तरीका अपना रहा हूं वो है बरहा साफ़्ट्वेयर - (I love this method) http://www.baraha.com/BarahaIME.htm
डाउनलोड कीजिए - कीबोर्ड शार्टकट प्रेस कीजिए ऒर शुरु हो जाइए . जहां मन करे हिंदी में टाइप कीजिए.
दूसरा तरीका - http://kaulonline.com/uninagari/
तीसरा तरीका -
शुशा फ़ान्ट (http://www.abhivyakti-hindi.org/abhi/hindi_shusha_fonts_dl_help.htm)
उठाइए और लिखना शुरु कीजिए. http://manaskriti.com/su/ से कन्वर्टर उठाइए और अपने शुशा
टेक्स्ट को कन्वर्ट कर लीजिए युनिकोड में.
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